केन्द्रीय हिमालयीय संस्कृति शिक्षण संस्थान, दाहुँग (अरूणाचल प्रदेश)
संक्षिप्त परिचय

image

संस्थापनाः केन्द्रीय हिमालयीय संस्कृति शिक्षण संस्थान, दाहुँग (अ.प्र.) की स्थापना एवं शैक्षणिक सत्रारम्भ 4 अगस्त 2003 से प्रारम्भ हुआ। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली 10 नवम्बर 2010 से एक स्वायत्तशासी संस्थान एंव सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से सम्बद्ध हैं। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने पहल करते हुए इस क्षेत्र विशेष के लोगों हेतु एक हिमालयीय संस्कृति शिक्षण संस्थान स्थापित करना चाहा जो क्षेत्रीय जनों के सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण एंव विकास हेतु उनके परम्परागत कला,शिल्प,विज्ञान एंव अन्य देशी ज्ञान को बढ़ा सके। इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अगस्त 2000 में एक कार्यबल गठित किया गया जो अरूणाचल प्रदेश में एक बौद्ध संस्थान की रूपरेखा एंव रूपात्मकता को खोज सके। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने कार्यबल की संस्तुति के आधार पर जब तक केन्द्रीय हिमालयीय संस्कृति शिक्षण संस्थान का स्वतन्त्र एवं अलग व्यवस्था समिति बनने तक बौद्ध संस्कृति संरक्षण महासभा,बोमडिला को आरम्भिक कार्य सौंपा। इसी क्रम में 8 अक्टूबर 2009 को एक ई.एफ.सी मीटिंग हुई और संयुक्त मंत्रिमण्डल ने 19 मई 2010 को के.हि.सं.शि.सं.दाहुँग को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन स्वायत्तशासी संस्था के रूप में संस्तुति प्रदान की। सोसाइटी पंजीकरण एक्ट 1860 के तहत 10 नवम्बर 2010 ईटानगर,अरूणाचल प्रदेश में अपने निम्न उद्देश्यों के तहत पंजीकृत हुआ-इसके तहत श्री रिनचिन टॉशी उपायुक्त बोमडिला, पश्चिमी कमेंग,अ.प्र.को दिनाकं 22 फरवरी 2011 को के.ही.सं.शि.सं.दाहुँग का पदेन (कार्यवाहक) निदेशक बनाया गया। 24 फरवरी 2011 से संस्थान का पदेन निदेशक का कार्यभार ग्रहण करते हुए उन्होंने विभिन्न चल एंव अचल सम्पत्तियों का बी.सी.पी.एस. बोमडिला से स्थानान्तरण किया। गेशे नवाङ्ग टॉशी बापू को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली ने 26 अक्टूबर 2012 को संस्थान का प्रथम निदेशक नियुक्त किया। उन्होंने 2 नवम्बर 2012 से पदभार ग्रहण किया।


(1) गतिविधियाँ : पाठ्यक्रम संचालित वर्तमान में संस्थान में अधोलिखित पाठ्यक्रम जारी है
a) पूर्व मध्यमा प्रथम एवं द्वितीय वर्ष – 2 वर्षीय (कक्षा 9 एवं 10 के समकक्ष)
b) पूर्व मध्यमा प्रथम एवं द्वितीय वर्ष --2 वर्षीय (कक्षा 11 एवं 12 के समकक्ष)
c) शास्त्री प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष –3 वर्षीय (बीए.I.II एवं III के समकक्ष)
d) आचार्य प्रथम एवं द्वितीय – 2 वर्षीय (एम.ए.प्रथम एवं द्वितीय)
e) वीद्या वारिधी -- 2 वर्षीय (पी.एच.डी/शोध भोट बौद्ध दर्शन के )
संस्थान, 1 जनवरी 2011 से संम्पूर्णानन्द संस्कृत वि.वि.वाराणसी से भोट बौद्ध दर्शन में आचार्य विद्या वारिधि (पी.एच.डी) हेतु सम्बद्ध है। संस्थान,श्री केमो पादु, प्रवक्ता राजनीति विज्ञान, कार्यक्रम अधिकारी राष्ट्रीय सेवा योजना की देखरेख में अनेक स्वैच्छिक एवं स्वयंसेवी योजनाओं से जुड़ा है।


(2) प्रवेश :- संस्थान के सभी पाठ्यक्रमों में प्रत्येक वर्ष के जून- जुलाई माह से लेकर जुलाई/अगस्त तक चलता है।


(3) परीक्षा :- संस्थान के सभी पाठ्यक्रमों में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा प्रत्येक वर्ष के अप्रैल-मई में आयोजित होता है ।
विद्यार्थियों के गुणवत्ता के आकलन हेतु अर्द्धवार्षिक परीक्षा प्रत्येक वर्ष के नवंबर माह में आयोजित होता है।


(4) उद्देश्य: सोसाइटी का उद्देश्य बौद्ध एवं हिमालयीय अध्ययन हेतु स्नातक, परा स्नातक एवं शोध के स्तर तक शिक्षा प्रदान करना है साथ ही फीडर स्कूल की स्थापना एवं रखरखाव की जिम्मेदकरी है। सोसाइटी के प्रमुख उद्देश्य निम्न है :-
4.1. केन्द्रीय हिमालयीय संस्कृति शिक्षण संस्थान, दाहुँग (अ.प्र.) के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं प्रबन्ध संचालन की व्यवस्था करना हैं। सोसाइटी की गतिविधियों अधोलिखित है -
4.1.1. सम्बद्ध विश्वविद्यालय से बौद्ध दर्शन एवं सांस्कृतिक अध्ययन के विभिन्न पाठ्य क्रमों में डिप्लोमा, डिग्री(उपाधि)एवं शोध स्तर तक शिक्षा प्रदान करना।
4.1.2 बौद्ध अध्ययन की उच्चत्तर शिक्षा एवं शोध हेतु विद्यार्थियों को तैयार करना। आधुनिक शोध प्रविधि के तहत भोट भाषा एवं साहित्य की जानकारी उपलब्ध करना है।
4.1.3 हिमालयी क्षेत्र विशेषत: भारत के पूर्वत्तर क्षेत्र में सांस्कृतिक मूल्यों, पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधानों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना।
4.1.4 राष्ट्र की मुख्य धारा के तहत परम्परागत कला एवं शिल्प की शिक्षा प्रदान करना जिससे अपनी नैतिक अस्मिता के साथ-साथ आर्थिक स्वालम्बन का उद्देश्य पूरा हो सके।
4.1.5 संस्थान के उपविधि के तहत तमाम पुरस्कार,सम्मान, छात्रवृत्ति एवं उपाधि प्रदान करना।
4.1.6 अनेक अवैतनिक सम्मान एवं विशेष योग्यता प्रदान करना।
4.1.7 विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों हेतु तमाम भवन निर्माण, सभागार,छात्रावास, शैक्षणिक, आवासीय निर्माण एवं मरम्मत की व्यवस्था करना।
4.1.8 इसी प्रकार की सभा अथवा विशेष आवश्यकता अथवा व्यावहारिक कुछ अथवा सभी सोसाटी की योजनाओं को करना।


उपलब्धियाँ
परीक्षा परिणाम :-
विद्यार्थियों के उत्तीर्णांक एवं प्रतिशत क्रमवार अधोलिखित :-
वर्ष ---------------प्रतिशत (उतीर्ण)
2011-------------81%
2012-------------84.27%
2013-------------78.24 %


नवीन पाठ्यक्रमों एवं योजनाओं की विवरणिका: के.हि.सं.शि.स,दाहुँग भोट बौद्ध दर्शन में परास्नातक एवं शोध उपाधि तक उपलब्ध करा रहा है। संस्थान, आनेवाले दिनों में/निकट भविष्य में निम्न पाठ्यक्रमों एवं गतिविधियों के लिए विचारशील है –
(i) चिकित्सा शास्त्र ( सोवा-रिग्पा) में स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम।
(ii) शिक्षा शास्त्री ( समकक्ष बी.एड.) ।
(iii) परम्परागत कला एवं शिल्प की स्नातक – पाठ्यक्रम।
(iv) अनुप्रयुक्त एवं व्यावसायिक शिक्षा के विभिन्न परास्नातक, स्नातक, सर्टिफिकेट कोर्स (प्रमाण-पत्र) पाठ्यक्रम।
(v) संस्थान के विभिन्न प्रकाशन कार्य जिनमें संस्थान में आयोजित व्याख्यान सभा, कार्यशाला, व्याख्यान माला की योजना।
(vi) अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्रारष्ट्रीय स्तर के व्याख्यान सभा का आयोजन।
(vii) अनेक सेटेलाइट फीडर स्कूल की स्थापना-विशेषत: ऐसे स्थान एवं मठ जहाँ इनकी आवश्यकता है।


केन्द्रीय हिमालयीय संस्कृति शिक्षण संस्थान, दाहुँग (अ.प्र.) हिमालयीय भोट बौद्ध दर्शन के स्नातक, स्नातकोत्तर, शोध पाठ्यक्रमों के साथ अनेक फीडर स्कूल, परम्परागत कला, शिल्प एवं आधुनिक ज्ञान के साथ सतत क्रियाशील है। निकट भविष्य में संस्थान को एक मान्य विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने की योजना है।